Sidebar Menu

Badal Saroj

लेखक मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के सदस्य हैं.

वामपंथ है कहाँ ? Where is the left ?

  • Aug 08, 2018

यह उस अवाम का ऑनेस्ट सवाल है जो वर्तमान परिदृश्य को देखकर चिंतित और फ़िक़्रमन्द है - जिसे वाम पर विश्वास है ।

Read More

16 अप्रैल : जब हम सबके लिए खडा होगा कोयला मजदूर

  • Apr 11, 2018

व्यापारिक खनन से नुकसान ठीक वैसा ही जैसे 111 लाख करोड़ रुपयों की राशि वाले सार्वजनिक बैंकों का पासवर्ड नीरव मोदी को दे दिया जाये । सरल शब्दों में कहें तो निजी घरानों के हाथों में इसे दे दिए जाने के घाटे और खतरे बहुआयामी भी हैं दूरगामी भी हैं ।

Read More

एकलव्य का अपराध : त्रिपुरा 4

  • Mar 10, 2018

एकलव्य का अपराध इस बार संगीन था । जो सीखा अपनी दम पर सीखा, न द्रोण से कुछ लिया - न अंगूठा दिया । खुद को हस्तिनापुर माने बैठों ने ज्यादा थानेदारी दिखाई तो अंगूठा दिखा जरूर दिया ।

Read More

शम्बूक का पाप - त्रिपुरा 3

  • Mar 10, 2018

JNU, HCU, BHU जैसी यूनिवर्सटियों को मिटाने पर आमादा, मध्यप्रदेश में सवा लाख सरकारी स्कूलों को बन्द करके शंबूको के लिए शिक्षा के दरवाजे बन्द करने वाली संघ पोषित सरकारों की त्रिपुरा से असली चिढ यह है कि इसने उनकी आँखें खोल दी हैं । ये दरअसल बुद्दि-भीरू हैं ।

Read More

अभिमन्यु की गलती - त्रिपुरा 2

  • Mar 06, 2018

इसलिये मार आर्तनाद मचा पड़ा था कि घेरो अभिमन्यु को, खतरनाक है उसका होना । जोड़ो पूरी खल मण्डली को । बीन ली गयी ऊपर से नीचे तक की पूरी कांग्रेस, समेट ली गयी तृणमूल कांग्रेस । न्यौता देकर बुलाये गए बांग्लादेश के बिलों में धकेल दिए गए अलग राष्ट्र का मंसूबा साधते आतंकी । छाँट छाँट कर चन्दनाभिषेक कर मंचासीन किये गए बलात्कारी और अपराधी ।

Read More

कठघरे में जटायु ? त्रिपुरा 1

  • Mar 06, 2018

यह समय इस तरह की लापरवाही का नहीं है । दांव पर वाम नहीं है, देश और अवाम है ।

Read More

मध्यप्रदेश ; उपचुनाव के नतीजों में दर्ज सन्देश

  • Mar 01, 2018

गंभीर राजनीति गंभीर विश्लेषण मांगती है। हार में जीत की सम्भावनायें - जीत में हार की आशंकायें देखने का शऊर सिखाती है। मध्यप्रदेश विधानसभा की इन दोनों सीटों के उपचुनावों में जीत का जश्न मनाने और उसके लिए श्रेय बटोरने की जल्दबाजी , वोटों की कमी के लिए इधर उधर के बहाने तलाशने की बजाय असली कारण देखने चाहिए और नया सारथी और रथ ढूंढने की बजाय रास्ते और मंजिल के बारे में सोचना चाहिए।

Read More

कासगंज के अंदेशे

  • Jan 30, 2018

उन्माद फैलाने के लिए प्रिंट-इलेक्ट्रॉनिक गोदी मीडिया और प्रोफेशनली अनप्रोफेशनल सोशल मीडिया के जरिये झूठ और भड़कावे की जी तोड़ कोशिशों के बावजूद अंततः 26 जनवरी को कासगंज में घटित घटना का असली सच उजागर होकर आ ही गया है ।

Read More

जीवन बचाने की छटपटाहट ने मिटाया मौत का डर

  • Jan 03, 2018

ईरान उबला पड़ा है । हजारों लोग सरकार और उसके धर्मगुरु मुखिया अयातुल्ला खोमैनी के खिलाफ सडकों पर हैं । अनेक मौतों और सुरक्षाबलों की छुट्टा गोलीबारी के बाद भी स्थिति काबू में नहीं आ पा रही ।

Read More